आखिर दवाइयां और इनके रेट आसमान क्यों छूते हैं.?

Global jurist
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आखिर दवाइयां और इनके रेट आसमान क्यों छूते हैं.?

पूरे देश के लोग जानते हैं की दवाइयां बनाने वाली बड़ी-बड़ी विदेशी कंपनियां हिंदुस्तान में बैठकर और हिंदुस्तान के बाहर से दवाइयां का कारोबार करती हैं पिछले कई दशकों से दवाइयां बनाने के मामले में हिंदुस्तान अग्रणी पंक्ति में खड़ा है लेकिन बावजूद इसके हिंदुस्तान के ही लोगों को दवाइयां भारी स्तर पर महंगी दी जाती हैं और आए दिन लोगों को अस्पतालों प्राइवेट अस्पतालों और दवाई विक्रेताओं के द्वारा बड़े स्तर पर लूटा जाता है, लेकिन सरकारी सस्ते दामों पर दवाई उपलब्ध करवाने में के लिए कानून बनाने में पूर्ण रूप से फिसडी साबित हुई है,

शायद ही कभी मुल्क की सरकारें दवाई कंपनियों को सभी बीमार लोगों को मुफ्त दवाई उपलब्ध करवाने के आदेश जारी करें:

कभी यह जांच में फेल होती हैं और उसके बाद यही दवाएं जांच में पास हो जाएगी और उसके बाद यही दवाएं मार्केट में महंगी करके बेची जाएगी,
₹20 की दवाई₹500 में मिलेगी,

देश का सबसे बड़ा घोटाला दवाई घोटाला है,
 लेकिन मजाल है लोकसभा व विधानसभाओ में इस पर कभी चर्चा हो और गरीबों को सस्ती दवाई दिलवाने हेतु सरकारे प्रयासरत हों..! जनता तो भोली भाली है

पेटेंट और मोनॉपॉली

नई दवाओं पर पेटेंट आमतौर पर 20 साल के लिए मिलता है, जिससे केवल वही कंपनी इसे बना और बेच सकती है।

इस समय में प्रतिस्पर्धा की कमी होती है, जिससे कंपनियां ऊंची कीमतें वसूलती हैं।

मार्केटिंग और प्रमोशन

दवाओं का प्रचार करने और डॉक्टरों के बीच इसे प्रचलित करने में भारी खर्च होता है।

इस लागत को भी ग्राहकों से वसूला जाता है।


 इम्पोर्टेड दवाइयां और टैक्सेशन

कई दवाइयां भारत में इम्पोर्ट की जाती हैं, जिन पर कस्टम ड्यूटी और टैक्स लगते हैं।

यह कीमतों को और बढ़ा देता है।


जनरल दवाइयों की कमी

ब्रांडेड दवाइयां महंगी होती हैं, लेकिन जेनेरिक दवाइयां (समान गुण वाली सस्ती दवाइयां) हमेशा उपलब्ध नहीं होतीं।

कंपनियां ब्रांडेड दवाइयों को बढ़ावा देने के लिए जेनेरिक दवाइयों को बाजार में आने से रोकने की कोशिश करती हैं।

 समाधान एवम सुझाव:

1. जेनेरिक दवाइयों का उपयोग: जेनेरिक दवाइयां ब्रांडेड दवाइयों से काफी सस्ती होती हैं।


2. सरकारी नियंत्रण: सरकार दवाइयों की कीमतों को नियंत्रित कर सकती है, जैसे कि आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल करना।


3. लोकल मैन्युफैक्चरिंग: इम्पोर्टेड दवाइयों की जगह लोकल उत्पादन को बढ़ावा देना।


4. जन औषधि केंद्र: इन केंद्रों पर सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयां उपलब्ध होती हैं।


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